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” विनोद ने कहा। सुधा ने भी अपनी टाँगें और फैला दी जिससे मुझे और आसानी हो सके। मैं अपनी जीभ उसकी चूत में घुसा कर उसे जोर से चोद रहा था। सुधा की सिस्करियाँ शुरू हो चुकी थी, “हाँ राज… ” इतना कहकर सुधा मेरा हाथ पकड़ मुझे सोफ़े के पास ले गयी। सुधा सोफ़े पे झुक कर घोड़ी बन गयी, और थोड़ा नीचे झुकते हुए उसने अपने गोरे चूत्तड़ ऊपर उठा दिए। उसकी गुलाबी और गीली चूत और उठ गयी थी। मैं अपने हाथ से उसके चूत्तड़ सहलाने लगा। फिर मैं अपना लंड उसकी चूत पर रख कर घिसने लगा। मैंने गर्दन घुमा कर देखा तो विनोद और नेहा मेरे बगल में खड़े एक दूसरे के नंगे बदन को सहला रहे थे, मगर उनकी आँखें मेरे लंड पे टिकी हुई थी। मैंने अपने लंड को धीरे से सुधा की चूत में घुसा दिया। सुधा की चूत काफी गीली थी और एक बार वो झड़ भी चुकी थी, फिर भी मुझे उसकी चूत में लंड घुसाने में बहुत जोर लगाना पड़ रहा था। इतनी कसी चूत थी उसकी। मैंने एक जोर का धक्का मार अपना लंड उसकी चूत की जड़ तक डाल दिया और उसे चोदने लगा। मैंने देखा कि विनोद और नेहा हमारे पास आ गये हैं। नेहा ने ठीक सुधा के बगल में सोफ़े पर लेट कर अपनी टाँगें फैला दी। उसकी चूत का मुँह और खुल गया था। उसकी गुलाबी चूत इतनी प्यारी थी और जैसे कह रही हो कि आओ मुझे चोदो। विनोद उसकी टाँगों के बीच आकर अपना खड़ा लंड उसकी चूत पे घिसने लगा। मैं सुधा की चूत को पीछे से चोद रहा था इसलिए मुझे साफ और अच्छी तरह दिखायी दे रहा था कि विनोद किस तरह अपना लंड नेहा की चूत पे रगड़ रहा था। सुधा ने अपना एक हाथ बढ़ा कर विनोद के लंड को अपने हाथों में ले लिया और उसे नेहा की चूत के मुँह पे रख दबाने लगी। क्या नज़ारा था, एक औरत दूसरे मर्द से चुदवा रही थी और अपने पति का लंड उस मर्द की बीवी की चूत पे रगड़ उसे चोदने को कह रही थी। मैं उत्तेजना के मारे सुधा के चूत्तड़ पकड़ कर कस-कस के धक्के लगा रहा था। सुधा ने नेहा की चूत अपने हाथों से और फैला दी और विनोद के लंड को ठीक वहीं पे रख दिया। विनोद ने इशारा समझ कर एक ही धक्के में अपना लंड पूरा पेल दिया। विनोद मेरी बीवी नेहा को जोर के धक्कों के साथ चोद रहा था और मैं उसकी बीवी सुधा की चूत मे अपना लंड पेल रहा था। मैंने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ायी तो सुधा पीछे की और घूम कर बोली, “सुशील थोड़ा धीरे-धीरे चोदो और अपनी बीवी को देखो।” मैंने देखा कि नेहा की टाँग मुड़ कर उसकी चूचियों पे थी और विनोद धीमे धक्कों के साथ उसे चोद रहा था। उसका मोटा लंड वीर्य रस से लसा हुआ लाईट में चमक रहा था। इतने में सुधा अपनी एक अँगुली नेहा की चूत में डाल अंदर बाहर करने लगी। सुधा की अँगुली और विनोद का लंड एक साथ नेहा की चूत में आ जा रहे थे। नेहा भी पूरी उत्तेजना में अपने चूत्तड़ उछाल कर विनोद के धक्कों का साथ दे रही थी। इतनी जोरदार चुदाई देख मैंने भी अपने धक्कों में तेजी ला दी। सुधा भी अपने चूत्तड़ पीछे की और धकेल कर ताल से ताल मिला रही थी। मैंने अपनी एक अँगुली सुधा की चूत में डाल कर गीली की और फिर उसकी गाँड के छेद पे घुमा कर धीरे से अंदर डाल दी। सुधा सिसक पड़ी, “ओहहहहह सुशील क्याआआआआ कर रहे हो?

” मैंने उसकी बात पे ध्यान नहीं दिया और उसे जोर से चोदते हुए अपनी अँगुली उसकी गाँड के अंदर बाहर करने लगा। अब उसे भी मज़ा आने लगा था। वहीं पर विनोद भी जम कर नेहा की चुदाई कर रहा था। मैंने सुधा के शरीर को अकड़ता पाया, और उसने मेरे लंड को अपनी चूत की गिरफ़्त में ले लिया। मैं जोर-जोर के धक्के लगा रहा था, मेरा भी पानी छूटने वाला था। मैंने दो चार धक्के मारे और मेरे लंड ने सुधा की चूत में बौंछार कर दी, साथ ही सुधा की चूत ने भी अपना पानी छोड़ दिया। मैं फिर भी धक्के मारे जा रहा था और अपनी बीवी नेहा को देख रहा था। उसकी साँसें तेज थी और वो सिसक रही थी, “ओहहहहहह आआहहहहह अजय…

.98 webcam girls 😉 Let’s take a close look at Payby Phone Part 2 of this story part 3 of this story Part 4 of this story ये कहानी करीब आज से छः महीने पहले शुरू हुई जब हमारे बगल के फ्लैट में नये पड़ोसी रहने के लिये आये। हमारे नये पड़ोसी मिस्टर विनोद एक कंसल्टेंट हैं, और उनकी पत्नी सुधा एक घरेलू महिला थी। वैसे तो मुम्बई इतना व्यस्त शहर है कि यहाँ किसी को किसी के लिये फुर्सत ही नहीं है। नये पड़ोसी होने के नाते हमारी जान पहचान बढ़ी और हम दो परिवार काफी घुल मिल गये थे। मैं और मेरी पत्नी नेहा के विचार एक समान थे। हम दोनों खुले सैक्स में विश्वास रखते थे। शादी के पहले ही हम दोनों सैक्स का मज़ा ले चुके थे। हम दोनों अपनी पूरानी सैक्स घटनाओं के बारे में अक्सर एक दूसरे को बताते रहते थे। चुदाई के किस्से सुनाते या सुनते वक्त नेहा इतनी उत्तेजित हो जाती की उसकी चूत की प्यास मिटाना कभी मुश्किल हो जाता था। मैंने और नेहा ने इस शनिवार को विनोद और सुधा को अपने यहाँ खाने की दावत दी। दोनों राज़ी हो गये। विनोद एक शानदार व्यक्तित्व का मालिक था, ६’२ ऊँचाई और कसरती बदन। सुधा भी काफी सुंदर थी, गोल चेहरा, लंबी टाँगें और खास तौर पर उसकी नीली आँखें। पता नहीं उसकी आँखों में क्या आकर्षण था कि जी करता हर वक्त उसकी आँखों में इंसान झाँकता रहे शनिवार की शाम ठीक सात बजे विनोद और सुधा हमारे घर पहुँचे। विनोद ने शॉट्‌र्स और टी-शर्ट पहन रखी थी, जिससे उसका कसरती बदन साफ़ झलक रहा था। सुधा ने कॉटन का टॉप और जींस पहन रखी थी। उसके कॉटन के टॉप से झलकते उसके निप्पल साफ़ बता रहे थे की उसने ब्रा नहीं पहन रखी है। उसकी काली जींस भी इतनी टाईट थी की उसके चूत्तड़ों की गोलाइयाँ किसी को भी दीवाना कर सकती थी। उसके काले रंग के ऊँची हील के सैंडल उसकी लंबी टाँगों को और भी सैक्सी बना रहे थे। उसे इस सैक्सी पोज़ में देख मेरे लंड में सरसराहट होने लग गयी थी। मैंने देखा की नेहा विनोद की और आकर्षित हो रही है। वो अपने अधखुले ब्लाऊज़ से विनोद को अपनी चूचियों के दर्शन करा रही थी। आज नेहा अपनी टाईट जींस और लो-कुट टॉप में कुछ ज्यादा ही सुंदर दिख रही थी। वहीं सुधा भी मेरे साथ ऐसे बरताव कर रही थी जैसे हम कई बरसों पुराने दोस्त हों। हम चारों आपस में ऐसे बात कर रहे थे कि कोई देख के कह नहीं सकता था कि हमारी जान पहचान चंद दिनों पूरानी है। पहले शराब का दौर चला और फिर खाना खाने के बाद हम सब ड्राईंग रूम में बैठे थे। मैंने स्टीरियो पर एक री-मिक्स की कैसेट लगा दी। सुधा ने खड़ी हो कर विनोद को डाँस करने के लिये कहा, किंतु उसने उसे मना कर दिया। शायद उसे नशा हो गया था, मगर उसने सुधा को मेरे साथ डाँस करने को कहा। सुधा ने मुझे खींच कर खड़ा कर दिया। हम दोनों गाने की धुन पर एक दूसरे के साथ नाच रहे थे। सुधा ने अपने दोनों हाथ मेरी गर्दन पर रख हुए थे और मुझसे सटते हुए नाच रही थी। उसके बदन की गर्मी मुझे मदहोश कर रही थी। मैंने भी अपने दोनों हाथ उसकी कमर पे रख उसे अपने और करीब खींच लिया। उसके बदन की गर्माहट और बदन से उठती खुशबू ने मुझे मजबूर कर दिया और मैंने कसके उसे अपनी छाती से चिपका लिया। मेरा लंड उसकी चूत पे ठोकर मार रहा था। तभी मुझे खयाल आया कि मेरी बीवी और उसका पति भी इसी कमरे में हैं। मैंने गर्दन घुमा के देखा तो पाया की नेहा विनोद को खींच कर डाँस के लिये खड़ा कर चुकी है। शायद मेरी बीवी की सुंदरता और खुलेपन ने विनोद को डाँस करने पे मजबूर कर दिया था, इसलिए वो नेहा को मना नहीं कर पाया। दोनों एक दूसरे को बांहों में ले हमारे पास ही डाँस कर रहे थे। नाचते-नाचते नेहा ने लाईट धीमी कर दी। कमरे में बहुत ही हल्की रोशनी थी। हम चारों कामुक्ता की आग में जल रहे थे। सुधा मुझसे और चिपकती हुई मेरे कान में बोली, “अच्छा है थोड़ा अंधेरा हो गया।” मैंने उसे और कस के अपनी बांहों में ले अपने होंठ उसके होंठों पे रख दिए। उसने भी सहयोग देते हुए अपना मुँह खोल दिया और जीभ मेरे मुँह में डाल दी। हम दोनों एक दूसरे की जीभ चुभलाने लगे। मेरे दोनों हाथ अब उसके चूत्तड़ों को सहला रहे थे। सुधा के हाथ मेरी पीठ पर थे और वो कामुक हो मेरी पीठ को कस के भींच लेती थी। मेरा लंड पूरा तन कर उसकी चूत को जींस के ऊपर से ही रगड़ रहा था। अच्छा था कि वो हाई हील की सैंडल पहनी हुई थी जिससे की उसकी चूत बिल्कुल मेरे लंड के स्तर तक आ रही थी। सुधा ने अपने आप को मुझे सोंप दिया था। मैंने पीछे से अपने दोनों हाथ उसकी जींस में डाल दिए और पाया की उसने पैंटी नहीं पहनी हुई है। मेरे हाथ अब उसके मुलायम चूत्तड़ों को जोर से भींच रहे थे, वो भी उत्तेजित हो अपनी चूत मेरे लंड पे रगड़ रही थी। मेरी बीवी नेहा का खयाल आते ही मैंने गर्दन घुमा के देखा तो चौंक पड़ा। दोनों एक दूसरे से चिपके हुए गाने की धुन पर डाँस कर रहे थे। विनोद के हाथ नेहा के शरीर पर रेंग रहे थे। नेहा भी उसे अपने बांहों में भर उसके होंठों को चूस रही थी। मैं सुधा को बांहों में ले इस पोज़िशन में डाँस करने लगा कि मुझे नेहा और विनोद साफ़ दिखायी पड़ें। चार साढ़े-चार इंच की हाई हील की सैंडल पहने होने के बावजूद नेहा विनोद के कंधे तक मुश्किल से ही पहुँच पा रही थी। विनोद का एक हाथ नेहा की चूचियों को सहला रहा था और दूसरा हाथ दूसरी चूँची को सहलाते हुए नीचे की और बढ़ रहा था, और नीचे जाते हुए अब वो उसकी चूत को उसकी टाईट जींस के ऊपर से सहला रहा था। मुझे हैरानी इस बात की थी कि उसे रोकने कि बजाय नेहा विनोद को सहयोग दे रही थी। उसने अपनी टाँगें थोड़ी फैला दी जिससे विनोद के हाथों को और आसानी हो। पर मैं कौन होता हूँ शिकायत करने वाला। मैं खुद उसकी बीवी को बांहों में भरे हुए उसे चोदने के मूड में था। मेरे भी हाथ सुधा के चूत्तड़ों को सहला रहे थे। सुधा उत्तेजना में मुझे चूमे जा रही थी। तभी मैंने देखा कि विनोद ने अपना एक हाथ नेहा के टॉप में डाल कर उसके मम्मों पे रख दिया था। जब उसने नेहा की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं देखी तो उसने हाथ पीठ की और ले जाकर उसकी ब्रा के हुक खोल दिए। मुझे उस पारदर्शी टॉप से साफ दिखायी दे रहा था कि विनोद के हाथ अब नेहा के मम्मों को सहला रहे थे। माहोल में जब चुदाई का आलम फ़ैलता है तो सब पीछे रह जाता है। मैंने भी आगे बढ़ कर सुधा के चूत्तड़ से हाथ निकाल उसकी जींस के बटन खोल जींस उतार दी। पैंटी तो उसने पहनी ही नहीं थी। “मैं सोच रही थी कि तुम्हें इतनी देर क्यों लग रही है।” सुधा अपने सैंडल युक्त पैरों से अपनी जींस को अलग करती हुए बोली। “प्लीज़ मुझे प्यार करो ना!” मैंने अपना हाथ बढ़ा कर उसकी चूत पे रख दिया। हाथ रखते ही मैंने पाया कि उसकी चूत एक दम सफ़ाचट थी। उसने अपनी चूत के बाल एक दम शेव किए हुए थे। बिना झाँटों की एक दम नयी चूत मेरे सामने थी। मैंने अपने हाथ का दबाव बढ़ा दिया और उसकी चूत को जोर से रगड़ने लगा। मैंने अपनी एक अँगुली उसकी चूत के मुहाने पर घुमायी तो पाया कि उसकी चूत गीली हो चुकी थी। “तुम अपनी अँगुली मेरी चूत में क्यों नहीं डालते, जिस तरह मेरे पति ने अपनी अँगुली तुम्हारी बीवी की चूत में डाली हुई है।” उसने कहा तो मैंने घूम कर देखा और पाया कि विनोद का एक हाथ मेरी बीवी की चूचियों को मसल रहा है और दूसरा हाथ उसकी खुली जींस से उसकी चूत पे था। उसके हाथ वहाँ क्या कर रहे थे मुझे समझते देर नहीं लगी। अचानक मेरी बीवी नेहा ने अपनी आँखें खोली और मेरी तरफ़ देखा। वो एक अनजान आदमी के हाथों को अपनी चूत पे महसूस कर रही थी और मैं एक परायी औरत की चूत में अँगुली कर रहा था। वो मेरी तरफ़ देख कर मुस्कुरायी और मैं समझ गया कि आज की रात हम दोनों के ख्वाब पूरे होने वाले हैं। नेहा मुस्कुराते हुए अपनी जींस और पैंटी पूरी उतार कर नंगी हो गयी। जैसे ही उसने अपनी जींस और पैंटी उतारी, उसने विनोद के कान में कुछ कहा। विनोद ने उसकी ब्रा और टॉप भी उतार दिए। अब वो एक दम नंगी उसकी बांहों में थी। विनोद के हाथ अब उसके नंगे बदन पर रेंग रहे थे। “लगता है हम उनसे पीछे रह गये।” कहकर सुधा ने मुझसे अलग होते हुए अपना टॉप उतार दिया। जैसे हम किसी प्रतिस्पर्धा में हों। सुधा अब बिल्कुल नंगी हो गयी, उसने सिर्फ पैरों में हाई-हील के सैंडल पहने हुए थे। “लगता है कि हमें उनसे आगे बढ़ना चाहिए,” कहकर सुधा ने मेरी जींस के बटन खोल मेरे लंड को अपने हाथों में ले लिया। सुधा मेरे लंड को सहला रही थी और मेरा लंड उसके हाथों की गर्माहट से तनता जा रहा था। सुधा एक अनुभवी चुदक्कड़ औरत की तरह मेरे लंड से खेल रही थी। मैं भी अपनी जींस और अंडरवियर से बाहर निकल नंगा सुधा के सामने खड़ा था। सुधा ने मेरे लंड को अपने हाथों में लिया, जो तन कर सढ़े आठ इंच का हो गया था। “बहुत मोटा और लंबा है” कहकर सुधा लंड को दबाने लगी। मैंने घूम कर देखा तो पाया कि मेरी बीवी मुझसे आगे ही थी। नेहा विनोद के सामने घुटनों के बल बैठी उसके लंड को हाथों में पकड़े हुए थी। विनोद का लंड लंबाई में मेरे ही साईज़ का था पर कुछ मुझसे ज्यादा मोटा था। नेहा उसके लंड की पूरी लंबाई को सहलाते हुए उसके सुपाड़े को चाट रही थी। मुझे पता था कि नेहा की इस हर्कत का असर विनोद पर बुरा पड़ने वाला है। नेहा लंड चूसने में इतनी माहिर थी कि उसकी बराबरी कोई नहीं कर सकता था। उसका लंड चूसने का अंदाज़ ही अलग था। वो पहले लंड के सुपाड़े को अपने होठों में ले कर चूसती और फिर धीरे-धीरे लंड को अपने मुँह में भींचती हुई नीचे की और बढ़ती जिससे लंड उसके गले तक चला जाता। फिर अपनी जीभ से चाटते हुए लंड ऊपर की और उठाती। यही हर्कत जब वो तेजी से करती तो सामने वाले की हालत खराब हो जाती थी। इसी तरह से वो विनोद के लंड को चूसे जा रही थी। जब वो उसके सुपाड़े को चूसती तो अपने थूक से सने हाथों से जोर-जोर से लंड को रगड़ती। मैं जानता था कि विनोद अपने आपको ज्यादा देर तक नहीं रोक पायेगा। करीब दस मिनट तक नेहा विनोद के लंड की चूसाई करती रही। मैं और सुधा भी दिलचस्पी से ये नज़ारा देख रहे थे। विनोद ने अपने लंड को नेहा के मुँह से बाहर निकाला और मेरे और सुधा के पास आ खड़ा हो गया। सुधा मेरे लंड को सहला रही थी और विनोद अपने होंठ सुधा के होंठों पे रख उन्हें चूमने लगा। सुधा उससे अलग होते हुए बोली, “अजय!Once you have selected your niche and narrowed it down to your personal flavor, you can even show and filter your girls by the following: specific regions, languages, high quality, audio, hot rooms, new models and even low priced models! 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इतनी उत्तेजित हो जाती की उसकी चूत की प्यास मिटाना कभी मुश्किल हो जाता था। मैंने और नेहा ने इस शनिवार को विनोद और सुधा को अपने यहाँ खाने की दावत दी। दोनों राज़ी हो गये। विनोद एक शानदार व्यक्तित्व का मालिक था, ६’२ ऊँचाई और कसरती बदन। सुधा भी काफी सुंदर थी, गोल चेहरा, लंबी टाँगें और खास तौर पर उसकी नीली आँखें। पता नहीं उसकी आँखों में क्या आकर्षण था कि जी करता हर वक्त उसकी आँखों में इंसान झाँकता रहे शनिवार की शाम ठीक सात बजे विनोद और सुधा हमारे घर पहुँचे। विनोद ने शॉट्‌र्स और टी-शर्ट पहन रखी थी, जिससे उसका कसरती बदन साफ़ झलक रहा था। सुधा ने कॉटन का टॉप और जींस पहन रखी थी। उसके कॉटन के टॉप से झलकते उसके निप्पल साफ़ बता रहे थे की उसने ब्रा नहीं पहन रखी है। उसकी काली जींस भी इतनी टाईट थी की उसके चूत्तड़ों की गोलाइयाँ किसी को भी दीवाना कर सकती थी। उसके काले रंग के ऊँची हील के सैंडल उसकी लंबी टाँगों को और भी सैक्सी बना रहे थे। उसे इस सैक्सी पोज़ में देख मेरे लंड में सरसराहट होने लग गयी थी। मैंने देखा की नेहा विनोद की और आकर्षित हो रही है। वो अपने अधखुले ब्लाऊज़ से विनोद को अपनी चूचियों के दर्शन 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.98 webcam girls 😉 Let’s take a close look at Payby Phone Part 2 of this story part 3 of this story Part 4 of this story ये कहानी करीब आज से छः महीने पहले शुरू हुई जब हमारे बगल के फ्लैट में नये पड़ोसी रहने के लिये आये। हमारे नये पड़ोसी मिस्टर विनोद एक कंसल्टेंट हैं, और उनकी पत्नी सुधा एक घरेलू महिला थी। वैसे तो मुम्बई इतना व्यस्त शहर है कि यहाँ किसी को किसी के लिये फुर्सत ही नहीं है। नये पड़ोसी होने के नाते हमारी जान पहचान बढ़ी और हम दो परिवार काफी घुल मिल गये थे। मैं और मेरी पत्नी नेहा के विचार एक समान थे। हम दोनों खुले सैक्स में विश्वास रखते थे। शादी के पहले ही हम दोनों सैक्स का मज़ा ले चुके थे। हम दोनों अपनी पूरानी सैक्स घटनाओं के बारे में अक्सर एक दूसरे को बताते रहते थे। चुदाई के किस्से सुनाते या सुनते वक्त नेहा इतनी उत्तेजित हो जाती की उसकी चूत की प्यास मिटाना कभी मुश्किल हो जाता था। मैंने और नेहा ने इस शनिवार को विनोद और सुधा को अपने यहाँ खाने की दावत दी। दोनों राज़ी हो गये। विनोद एक शानदार व्यक्तित्व का मालिक था, ६’२ ऊँचाई और कसरती बदन। सुधा भी काफी सुंदर थी, गोल चेहरा, लंबी टाँगें और खास तौर पर उसकी नीली आँखें। पता नहीं उसकी आँखों में क्या आकर्षण था कि जी करता हर वक्त उसकी आँखों में इंसान झाँकता रहे शनिवार की शाम ठीक सात बजे विनोद और सुधा हमारे घर पहुँचे। विनोद ने शॉट्‌र्स और टी-शर्ट पहन रखी थी, जिससे उसका कसरती बदन साफ़ झलक रहा था। सुधा ने कॉटन का टॉप और जींस पहन रखी थी। उसके कॉटन के टॉप से झलकते उसके निप्पल साफ़ बता रहे थे की उसने ब्रा नहीं पहन रखी है। उसकी काली जींस भी इतनी टाईट थी की उसके चूत्तड़ों की गोलाइयाँ किसी को भी दीवाना कर सकती थी। उसके काले रंग के ऊँची हील के सैंडल उसकी लंबी टाँगों को और भी सैक्सी बना रहे थे। उसे इस सैक्सी पोज़ में देख मेरे लंड में सरसराहट होने लग गयी थी। मैंने देखा की नेहा विनोद की और आकर्षित हो रही है। वो अपने अधखुले ब्लाऊज़ से विनोद को अपनी चूचियों के दर्शन करा रही थी। आज नेहा अपनी टाईट जींस और लो-कुट टॉप में कुछ ज्यादा ही सुंदर दिख रही थी। वहीं सुधा भी मेरे साथ ऐसे बरताव कर रही थी जैसे हम कई बरसों पुराने दोस्त हों। हम चारों आपस में ऐसे बात कर रहे थे कि कोई देख के कह नहीं सकता था कि हमारी जान पहचान चंद दिनों पूरानी है। पहले शराब का दौर चला और फिर खाना खाने के बाद हम सब ड्राईंग रूम में बैठे थे। मैंने स्टीरियो पर एक री-मिक्स की कैसेट लगा दी। सुधा ने खड़ी हो कर विनोद को डाँस करने के लिये कहा, किंतु उसने उसे मना कर दिया। शायद उसे नशा हो गया था, मगर उसने सुधा को मेरे साथ डाँस करने को कहा। सुधा ने मुझे खींच कर खड़ा कर दिया। हम दोनों गाने की धुन पर एक दूसरे के साथ नाच रहे थे। सुधा ने अपने दोनों हाथ मेरी गर्दन पर रख हुए थे और मुझसे सटते हुए नाच रही थी। उसके बदन की गर्मी मुझे मदहोश कर रही थी। मैंने भी अपने दोनों हाथ उसकी कमर पे रख उसे अपने और करीब खींच लिया। उसके बदन की गर्माहट और बदन से उठती खुशबू ने मुझे मजबूर कर दिया और मैंने कसके उसे अपनी छाती से चिपका लिया। मेरा लंड उसकी चूत पे ठोकर मार रहा था। तभी मुझे खयाल आया कि मेरी बीवी और उसका पति भी इसी कमरे में हैं। मैंने गर्दन घुमा के देखा तो पाया की नेहा विनोद को खींच कर डाँस के लिये खड़ा कर चुकी है। शायद मेरी बीवी की सुंदरता और खुलेपन ने विनोद को डाँस करने पे मजबूर कर दिया था, इसलिए वो नेहा को मना नहीं कर पाया। दोनों एक दूसरे को बांहों में ले हमारे पास ही डाँस कर रहे थे। नाचते-नाचते नेहा ने लाईट धीमी कर दी। कमरे में बहुत ही हल्की रोशनी थी। हम चारों कामुक्ता की आग में जल रहे थे। सुधा मुझसे और चिपकती हुई मेरे कान में बोली, “अच्छा है थोड़ा अंधेरा हो गया।” मैंने उसे और कस के अपनी बांहों में ले अपने होंठ उसके होंठों पे रख दिए। उसने भी सहयोग देते हुए अपना मुँह खोल दिया और जीभ मेरे मुँह में डाल दी। हम दोनों एक दूसरे की जीभ चुभलाने लगे। मेरे दोनों हाथ अब उसके चूत्तड़ों को सहला रहे थे। सुधा के हाथ मेरी पीठ पर थे और वो कामुक हो मेरी पीठ को कस के भींच लेती थी। मेरा लंड पूरा तन कर उसकी चूत को जींस के ऊपर से ही रगड़ रहा था। अच्छा था कि वो हाई हील की सैंडल पहनी हुई थी जिससे की उसकी चूत बिल्कुल मेरे लंड के स्तर तक आ रही थी। सुधा ने अपने आप को मुझे सोंप दिया था। मैंने पीछे से अपने दोनों हाथ उसकी जींस में डाल दिए और पाया की उसने पैंटी नहीं पहनी हुई है। मेरे हाथ अब उसके मुलायम चूत्तड़ों को जोर से भींच रहे थे, वो भी उत्तेजित हो अपनी चूत मेरे लंड पे रगड़ रही थी। मेरी बीवी नेहा का खयाल आते ही मैंने गर्दन घुमा के देखा तो चौंक पड़ा। दोनों एक दूसरे से चिपके हुए 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में बैठे थे। मैंने स्टीरियो पर एक री-मिक्स की कैसेट लगा दी। सुधा ने खड़ी हो कर विनोद को डाँस करने के लिये कहा, किंतु उसने उसे मना कर दिया। शायद उसे नशा हो गया था, मगर उसने सुधा को मेरे साथ डाँस करने को कहा। सुधा ने मुझे खींच कर खड़ा कर दिया। हम दोनों गाने की धुन पर एक दूसरे के साथ नाच रहे थे। सुधा ने अपने दोनों हाथ मेरी गर्दन पर रख हुए थे और मुझसे सटते हुए नाच रही थी। उसके बदन की गर्मी मुझे मदहोश कर रही थी। मैंने भी अपने दोनों हाथ उसकी कमर पे रख उसे अपने और करीब खींच लिया। उसके बदन की गर्माहट और बदन से उठती खुशबू ने मुझे मजबूर कर दिया और मैंने कसके उसे अपनी छाती से चिपका लिया। मेरा लंड उसकी चूत पे ठोकर मार रहा था। तभी मुझे खयाल आया कि मेरी बीवी और उसका पति भी इसी कमरे में हैं। मैंने गर्दन घुमा के देखा तो पाया की नेहा विनोद को खींच कर डाँस के लिये खड़ा कर चुकी है। शायद मेरी बीवी की सुंदरता और खुलेपन ने विनोद को डाँस करने पे मजबूर कर दिया था, इसलिए वो नेहा को मना नहीं कर पाया। दोनों एक दूसरे को बांहों में ले हमारे पास ही डाँस कर रहे थे। नाचते-नाचते नेहा ने लाईट धीमी कर दी। कमरे में बहुत 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में बैठे थे। मैंने स्टीरियो पर एक री-मिक्स की कैसेट लगा दी। सुधा ने खड़ी हो कर विनोद को डाँस करने के लिये कहा, किंतु उसने उसे मना कर दिया। शायद उसे नशा हो गया था, मगर उसने सुधा को मेरे साथ डाँस करने को कहा। सुधा ने मुझे खींच कर खड़ा कर दिया। हम दोनों गाने की धुन पर एक दूसरे के साथ नाच रहे थे। सुधा ने अपने दोनों हाथ मेरी गर्दन पर रख हुए थे और मुझसे सटते हुए नाच रही थी। उसके बदन की गर्मी मुझे मदहोश कर रही थी। मैंने भी अपने दोनों हाथ उसकी कमर पे रख उसे अपने और करीब खींच लिया। उसके बदन की गर्माहट और बदन से उठती खुशबू ने मुझे मजबूर कर दिया और मैंने कसके उसे अपनी छाती से चिपका लिया। मेरा लंड उसकी चूत पे ठोकर मार रहा था। तभी मुझे खयाल आया कि मेरी बीवी और उसका पति भी इसी कमरे में हैं। मैंने गर्दन घुमा के देखा तो पाया की नेहा विनोद को खींच कर डाँस के लिये खड़ा कर चुकी है। शायद मेरी बीवी की सुंदरता और खुलेपन ने विनोद को डाँस करने पे मजबूर कर दिया था, इसलिए वो नेहा को मना नहीं कर पाया। दोनों एक दूसरे को बांहों में ले हमारे पास ही डाँस कर रहे थे। नाचते-नाचते नेहा ने लाईट धीमी कर दी। कमरे में बहुत ही हल्की रोशनी थी। हम चारों कामुक्ता की आग में जल रहे थे। सुधा मुझसे और चिपकती हुई मेरे कान में बोली, “अच्छा है थोड़ा अंधेरा हो गया।” मैंने उसे और कस के अपनी बांहों में ले अपने होंठ उसके होंठों पे रख दिए। उसने भी सहयोग देते हुए अपना मुँह खोल दिया और जीभ मेरे मुँह में डाल दी। हम दोनों एक दूसरे की जीभ चुभलाने लगे। मेरे दोनों हाथ अब उसके चूत्तड़ों को सहला रहे थे। सुधा के हाथ मेरी पीठ पर थे और वो कामुक हो मेरी पीठ को कस के भींच लेती थी। मेरा लंड पूरा तन कर उसकी चूत को जींस के ऊपर से ही रगड़ रहा था। अच्छा था कि वो हाई हील की सैंडल पहनी हुई थी जिससे की उसकी चूत बिल्कुल मेरे लंड के स्तर तक आ रही थी। सुधा ने अपने आप को मुझे सोंप दिया था। मैंने पीछे से अपने दोनों हाथ उसकी जींस में डाल दिए और पाया की उसने पैंटी नहीं पहनी हुई है। मेरे हाथ अब उसके मुलायम चूत्तड़ों को जोर से भींच रहे थे, वो भी उत्तेजित हो अपनी चूत मेरे लंड पे रगड़ रही थी। मेरी बीवी नेहा का खयाल आते ही मैंने गर्दन घुमा के देखा तो चौंक पड़ा। दोनों एक दूसरे से चिपके हुए गाने की धुन पर डाँस कर रहे थे। विनोद के हाथ नेहा के शरीर पर रेंग रहे थे। नेहा भी उसे अपने बांहों में भर उसके होंठों को चूस रही थी। मैं सुधा को बांहों में ले इस पोज़िशन में डाँस करने लगा कि मुझे नेहा और विनोद साफ़ दिखायी पड़ें। चार साढ़े-चार इंच की हाई हील की सैंडल पहने होने के बावजूद नेहा विनोद के कंधे तक मुश्किल से ही पहुँच पा रही थी। विनोद का एक हाथ नेहा की चूचियों को सहला रहा था और दूसरा हाथ दूसरी चूँची को सहलाते हुए नीचे की और बढ़ रहा था, और नीचे जाते हुए अब वो उसकी चूत को उसकी टाईट जींस के ऊपर से सहला रहा था। मुझे हैरानी इस बात की थी कि उसे रोकने कि बजाय नेहा विनोद को सहयोग दे रही थी। उसने अपनी टाँगें थोड़ी फैला दी जिससे विनोद के हाथों को और आसानी हो। पर मैं कौन होता हूँ शिकायत करने वाला। मैं खुद उसकी बीवी को बांहों में भरे हुए उसे चोदने के मूड में था। मेरे भी हाथ सुधा के चूत्तड़ों को सहला रहे थे। सुधा उत्तेजना में मुझे चूमे जा रही थी। तभी मैंने देखा कि विनोद ने अपना एक हाथ नेहा के टॉप में डाल कर उसके मम्मों पे रख दिया था। जब उसने नेहा की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं देखी तो उसने हाथ पीठ की और ले जाकर उसकी ब्रा के हुक खोल दिए। मुझे उस पारदर्शी टॉप से साफ दिखायी दे रहा था कि विनोद के हाथ अब नेहा के मम्मों को सहला रहे थे। माहोल में जब चुदाई का आलम फ़ैलता है तो सब पीछे रह जाता है। मैंने भी आगे बढ़ कर सुधा के चूत्तड़ से हाथ निकाल उसकी जींस के बटन खोल जींस उतार दी। पैंटी तो उसने पहनी ही नहीं थी। “मैं सोच रही थी कि तुम्हें इतनी देर क्यों लग रही है।” सुधा अपने सैंडल युक्त पैरों से अपनी जींस को अलग करती हुए बोली। “प्लीज़ मुझे प्यार करो ना!

” मैंने अपना हाथ बढ़ा कर उसकी चूत पे रख दिया। हाथ रखते ही मैंने पाया कि उसकी चूत एक दम सफ़ाचट थी। उसने अपनी चूत के बाल एक दम शेव किए हुए थे। बिना झाँटों की एक दम नयी चूत मेरे सामने थी। मैंने अपने हाथ का दबाव बढ़ा दिया और उसकी चूत को जोर से रगड़ने लगा। मैंने अपनी एक अँगुली उसकी चूत के मुहाने पर घुमायी तो पाया कि उसकी चूत गीली हो चुकी थी। “तुम अपनी अँगुली मेरी चूत में क्यों नहीं डालते, जिस तरह मेरे पति ने अपनी अँगुली तुम्हारी बीवी की चूत में डाली हुई है।” उसने कहा तो मैंने घूम कर देखा और पाया कि विनोद का एक हाथ मेरी बीवी की चूचियों को मसल रहा है और दूसरा हाथ उसकी खुली जींस से उसकी चूत पे था। उसके हाथ वहाँ क्या कर रहे थे मुझे समझते देर नहीं लगी। अचानक मेरी बीवी नेहा ने अपनी आँखें खोली और मेरी तरफ़ देखा। वो एक अनजान आदमी के हाथों को अपनी चूत पे महसूस कर रही थी और मैं एक परायी औरत की चूत में अँगुली कर रहा था। वो मेरी तरफ़ देख कर मुस्कुरायी और मैं समझ गया कि आज की रात हम दोनों के ख्वाब पूरे होने वाले हैं। नेहा मुस्कुराते हुए अपनी जींस और पैंटी पूरी उतार कर नंगी हो गयी। जैसे ही उसने अपनी जींस और पैंटी उतारी, उसने विनोद के कान में कुछ कहा। विनोद ने उसकी ब्रा और टॉप भी उतार दिए। अब वो एक दम नंगी उसकी बांहों में थी। विनोद के हाथ अब उसके नंगे बदन पर रेंग रहे थे। “लगता है हम उनसे पीछे रह गये।” कहकर सुधा ने मुझसे अलग होते हुए अपना टॉप उतार दिया। जैसे हम किसी प्रतिस्पर्धा में हों। सुधा अब बिल्कुल नंगी हो गयी, उसने सिर्फ पैरों में हाई-हील के सैंडल पहने हुए थे। “लगता है कि हमें उनसे आगे बढ़ना चाहिए,” कहकर सुधा ने मेरी जींस के बटन खोल मेरे लंड को अपने हाथों में ले लिया। सुधा मेरे लंड को सहला रही थी और मेरा लंड उसके हाथों की गर्माहट से तनता जा रहा था। सुधा एक अनुभवी चुदक्कड़ औरत की तरह मेरे लंड से खेल रही थी। मैं भी अपनी जींस और अंडरवियर से बाहर निकल नंगा सुधा के सामने खड़ा था। सुधा ने मेरे लंड को अपने हाथों में लिया, जो तन कर सढ़े आठ इंच का हो गया था। “बहुत मोटा और लंबा है” कहकर सुधा लंड को दबाने लगी। मैंने घूम कर देखा तो पाया कि मेरी बीवी मुझसे आगे ही थी। नेहा विनोद के सामने घुटनों के बल बैठी उसके लंड को हाथों में पकड़े हुए थी। विनोद का लंड लंबाई में मेरे ही साईज़ का था पर कुछ मुझसे ज्यादा मोटा था। नेहा उसके लंड की पूरी लंबाई को सहलाते हुए उसके सुपाड़े को चाट रही थी। मुझे पता था कि नेहा की इस हर्कत का असर विनोद पर बुरा पड़ने वाला है। नेहा लंड चूसने में इतनी माहिर थी कि उसकी बराबरी कोई नहीं कर सकता था। उसका लंड चूसने का अंदाज़ ही अलग था। वो पहले लंड के सुपाड़े को अपने होठों में ले कर चूसती और फिर धीरे-धीरे लंड को अपने मुँह में भींचती हुई नीचे की और बढ़ती जिससे लंड उसके गले तक चला जाता। फिर अपनी जीभ से चाटते हुए लंड ऊपर की और उठाती। यही हर्कत जब वो तेजी से करती तो सामने वाले की हालत खराब हो जाती थी। इसी तरह से वो विनोद के लंड को चूसे जा रही थी। जब वो उसके सुपाड़े को चूसती तो अपने थूक से सने हाथों से जोर-जोर से लंड को रगड़ती। मैं जानता था कि विनोद अपने आपको ज्यादा देर तक नहीं रोक पायेगा। करीब दस मिनट तक नेहा विनोद के लंड की चूसाई करती रही। मैं और सुधा भी दिलचस्पी से ये नज़ारा देख रहे थे। विनोद ने अपने लंड को नेहा के मुँह से बाहर निकाला और मेरे और सुधा के पास आ खड़ा हो गया। सुधा मेरे लंड को सहला रही थी और विनोद अपने होंठ सुधा के होंठों पे रख उन्हें चूमने लगा। सुधा उससे अलग होते हुए बोली, “अजय!

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Part 2 of this story part 3 of this story Part 4 of this story ये कहानी करीब आज से छः महीने पहले शुरू हुई जब हमारे बगल के फ्लैट में नये पड़ोसी रहने के लिये आये। हमारे नये पड़ोसी मिस्टर विनोद एक कंसल्टेंट हैं, और उनकी पत्नी सुधा एक घरेलू महिला थी। वैसे तो मुम्बई इतना व्यस्त शहर है कि यहाँ किसी को किसी के लिये फुर्सत ही नहीं है। नये पड़ोसी होने के नाते हमारी जान पहचान बढ़ी और हम दो परिवार काफी घुल मिल गये थे। मैं और मेरी पत्नी नेहा के विचार एक समान थे। हम दोनों खुले सैक्स में विश्वास रखते थे। शादी के पहले ही हम दोनों सैक्स का मज़ा ले चुके थे। हम दोनों अपनी पूरानी सैक्स घटनाओं के बारे में अक्सर एक दूसरे को बताते रहते थे। चुदाई के किस्से सुनाते या सुनते वक्त नेहा इतनी उत्तेजित हो जाती की उसकी चूत की प्यास मिटाना कभी मुश्किल हो जाता था। मैंने और नेहा ने इस शनिवार को विनोद और सुधा को अपने यहाँ खाने की दावत दी। दोनों राज़ी हो गये। विनोद एक शानदार व्यक्तित्व का मालिक था, ६’२ ऊँचाई और कसरती बदन। सुधा भी काफी सुंदर थी, गोल चेहरा, लंबी टाँगें और खास तौर पर उसकी नीली आँखें। पता नहीं उसकी आँखों में क्या आकर्षण था कि जी करता हर वक्त उसकी आँखों में इंसान झाँकता रहे शनिवार की शाम ठीक सात बजे विनोद और सुधा हमारे घर पहुँचे। विनोद ने शॉट्‌र्स और टी-शर्ट पहन रखी थी, जिससे उसका कसरती बदन साफ़ झलक रहा था। सुधा ने कॉटन का टॉप और जींस पहन रखी थी। उसके कॉटन के टॉप से झलकते उसके निप्पल साफ़ बता रहे थे की उसने ब्रा नहीं पहन रखी है। उसकी काली जींस भी इतनी टाईट थी की उसके चूत्तड़ों की गोलाइयाँ किसी को भी दीवाना कर सकती थी। उसके काले रंग के ऊँची हील के सैंडल उसकी लंबी टाँगों को और भी सैक्सी बना रहे थे। उसे इस सैक्सी पोज़ में देख मेरे लंड में सरसराहट होने लग गयी थी। मैंने देखा की नेहा विनोद की और आकर्षित हो रही है। वो अपने अधखुले ब्लाऊज़ से विनोद को अपनी चूचियों के दर्शन करा रही थी। आज नेहा अपनी टाईट जींस और लो-कुट टॉप में कुछ ज्यादा ही सुंदर दिख रही थी। वहीं सुधा भी मेरे साथ ऐसे बरताव कर रही थी जैसे हम कई बरसों पुराने दोस्त हों। हम चारों आपस में ऐसे बात कर रहे थे कि कोई देख के कह नहीं सकता था कि हमारी जान पहचान चंद दिनों पूरानी है। पहले शराब का दौर चला और फिर खाना खाने के बाद हम सब ड्राईंग रूम में बैठे थे। मैंने स्टीरियो पर एक री-मिक्स की कैसेट लगा दी। सुधा ने खड़ी हो कर विनोद को डाँस करने के लिये कहा, किंतु उसने उसे मना कर दिया। शायद उसे नशा हो गया था, मगर उसने सुधा को मेरे साथ डाँस करने को कहा। सुधा ने मुझे खींच कर खड़ा कर दिया। हम दोनों गाने की धुन पर एक दूसरे के साथ नाच रहे थे। सुधा ने अपने दोनों हाथ मेरी गर्दन पर रख हुए थे और मुझसे सटते हुए नाच रही थी। उसके बदन की गर्मी मुझे मदहोश कर रही थी। मैंने भी अपने दोनों हाथ उसकी कमर पे रख उसे अपने और करीब खींच लिया। उसके बदन की गर्माहट और बदन से उठती खुशबू ने मुझे मजबूर कर दिया और मैंने कसके उसे अपनी छाती से चिपका लिया। मेरा लंड उसकी चूत पे ठोकर मार रहा था। तभी मुझे खयाल आया कि मेरी बीवी और उसका पति भी इसी कमरे में हैं। मैंने गर्दन घुमा के देखा तो पाया की नेहा विनोद को खींच कर डाँस के लिये खड़ा कर चुकी है। शायद मेरी बीवी की सुंदरता और खुलेपन ने विनोद को डाँस करने पे मजबूर कर दिया था, इसलिए वो नेहा को मना नहीं कर पाया। दोनों एक दूसरे को बांहों में ले हमारे पास ही डाँस कर रहे थे। नाचते-नाचते नेहा ने लाईट धीमी कर दी। कमरे में बहुत ही हल्की रोशनी थी। हम चारों कामुक्ता की आग में जल रहे थे। सुधा मुझसे और चिपकती हुई मेरे कान में बोली, “अच्छा है थोड़ा अंधेरा हो गया।” मैंने उसे और कस के अपनी बांहों में ले अपने होंठ उसके होंठों पे रख दिए। उसने भी सहयोग देते हुए अपना मुँह खोल दिया और जीभ मेरे मुँह में डाल दी। हम दोनों एक दूसरे की जीभ चुभलाने लगे। मेरे दोनों हाथ अब उसके चूत्तड़ों को सहला रहे थे। सुधा के हाथ मेरी पीठ पर थे और वो कामुक हो मेरी पीठ को कस के भींच लेती थी। मेरा लंड पूरा तन कर उसकी चूत को जींस के ऊपर से ही रगड़ रहा था। अच्छा था कि वो हाई हील की सैंडल पहनी हुई थी जिससे की उसकी चूत बिल्कुल मेरे लंड के स्तर तक आ रही थी। सुधा ने अपने आप को मुझे सोंप दिया था। मैंने पीछे से अपने दोनों हाथ उसकी जींस में डाल दिए और पाया की उसने पैंटी नहीं पहनी हुई है। मेरे हाथ अब उसके मुलायम चूत्तड़ों को जोर से भींच रहे थे, वो भी उत्तेजित हो अपनी चूत मेरे लंड पे रगड़ रही थी। मेरी बीवी नेहा का खयाल आते ही मैंने गर्दन घुमा के देखा तो चौंक पड़ा। दोनों एक दूसरे से चिपके हुए गाने की धुन पर डाँस कर रहे थे। विनोद के हाथ नेहा के शरीर पर रेंग रहे थे। नेहा भी उसे अपने बांहों में भर उसके होंठों को चूस रही थी। मैं सुधा को बांहों में ले इस पोज़िशन में डाँस करने लगा कि मुझे नेहा और विनोद साफ़ दिखायी पड़ें। चार साढ़े-चार इंच की हाई हील की सैंडल पहने होने के बावजूद नेहा विनोद के कंधे तक मुश्किल से ही पहुँच पा रही थी। विनोद का एक हाथ नेहा की चूचियों को सहला रहा था और दूसरा हाथ दूसरी चूँची को सहलाते हुए नीचे की और बढ़ रहा था, और नीचे जाते हुए अब वो उसकी चूत को उसकी टाईट जींस के ऊपर से सहला रहा था। मुझे हैरानी इस बात की थी कि उसे रोकने कि बजाय नेहा विनोद को सहयोग दे रही थी। उसने अपनी टाँगें थोड़ी फैला दी जिससे विनोद के हाथों को और आसानी हो। पर मैं कौन होता हूँ शिकायत करने वाला। मैं खुद उसकी बीवी को बांहों में भरे हुए उसे चोदने के मूड में था। मेरे भी हाथ सुधा के चूत्तड़ों को सहला रहे थे। सुधा उत्तेजना में मुझे चूमे जा रही थी। तभी मैंने देखा कि विनोद ने अपना एक हाथ नेहा के टॉप में डाल कर उसके मम्मों पे रख दिया था। जब उसने नेहा की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं देखी तो उसने हाथ पीठ की और ले जाकर उसकी ब्रा के हुक खोल दिए। मुझे उस पारदर्शी टॉप से साफ दिखायी दे रहा था कि विनोद के हाथ अब नेहा के मम्मों को सहला रहे थे। माहोल में जब चुदाई का आलम फ़ैलता है तो सब पीछे रह जाता है। मैंने भी आगे बढ़ कर सुधा के चूत्तड़ से हाथ निकाल उसकी जींस के बटन खोल जींस उतार दी। पैंटी तो उसने पहनी ही नहीं थी। “मैं सोच रही थी कि तुम्हें इतनी देर क्यों लग रही है।” सुधा अपने सैंडल युक्त पैरों से अपनी जींस को अलग करती हुए बोली। “प्लीज़ मुझे प्यार करो ना!

” मैंने अपना हाथ बढ़ा कर उसकी चूत पे रख दिया। हाथ रखते ही मैंने पाया कि उसकी चूत एक दम सफ़ाचट थी। उसने अपनी चूत के बाल एक दम शेव किए हुए थे। बिना झाँटों की एक दम नयी चूत मेरे सामने थी। मैंने अपने हाथ का दबाव बढ़ा दिया और उसकी चूत को जोर से रगड़ने लगा। मैंने अपनी एक अँगुली उसकी चूत के मुहाने पर घुमायी तो पाया कि उसकी चूत गीली हो चुकी थी। “तुम अपनी अँगुली मेरी चूत में क्यों नहीं डालते, जिस तरह मेरे पति ने अपनी अँगुली तुम्हारी बीवी की चूत में डाली हुई है।” उसने कहा तो मैंने घूम कर देखा और पाया कि विनोद का एक हाथ मेरी बीवी की चूचियों को मसल रहा है और दूसरा हाथ उसकी खुली जींस से उसकी चूत पे था। उसके हाथ वहाँ क्या कर रहे थे मुझे समझते देर नहीं लगी। अचानक मेरी बीवी नेहा ने अपनी आँखें खोली और मेरी तरफ़ देखा। वो एक अनजान आदमी के हाथों को अपनी चूत पे महसूस कर रही थी और मैं एक परायी औरत की चूत में अँगुली कर रहा था। वो मेरी तरफ़ देख कर मुस्कुरायी और मैं समझ गया कि आज की रात हम दोनों के ख्वाब पूरे होने वाले हैं। नेहा मुस्कुराते हुए अपनी जींस और पैंटी पूरी उतार कर नंगी हो गयी। जैसे ही उसने अपनी जींस और पैंटी उतारी, उसने विनोद के कान में कुछ कहा। विनोद ने उसकी ब्रा और टॉप भी उतार दिए। अब वो एक दम नंगी उसकी बांहों में थी। विनोद के हाथ अब उसके नंगे बदन पर रेंग रहे थे। “लगता है हम उनसे पीछे रह गये।” कहकर सुधा ने मुझसे अलग होते हुए अपना टॉप उतार दिया। जैसे हम किसी प्रतिस्पर्धा में हों। सुधा अब बिल्कुल नंगी हो गयी, उसने सिर्फ पैरों में हाई-हील के सैंडल पहने हुए थे। “लगता है कि हमें उनसे आगे बढ़ना चाहिए,” कहकर सुधा ने मेरी जींस के बटन खोल मेरे लंड को अपने हाथों में ले लिया। सुधा मेरे लंड को सहला रही थी और मेरा लंड उसके हाथों की गर्माहट से तनता जा रहा था। सुधा एक अनुभवी चुदक्कड़ औरत की तरह मेरे लंड से खेल रही थी। मैं भी अपनी जींस और अंडरवियर से बाहर निकल नंगा सुधा के सामने खड़ा था। सुधा ने मेरे लंड को अपने हाथों में लिया, जो तन कर सढ़े आठ इंच का हो गया था। “बहुत मोटा और लंबा है” कहकर सुधा लंड को दबाने लगी। मैंने घूम कर देखा तो पाया कि मेरी बीवी मुझसे आगे ही थी। नेहा विनोद के सामने घुटनों के बल बैठी उसके लंड को हाथों में पकड़े हुए थी। विनोद का लंड लंबाई में मेरे ही साईज़ का था पर कुछ मुझसे ज्यादा मोटा था। नेहा उसके लंड की पूरी लंबाई को सहलाते हुए उसके सुपाड़े को चाट रही थी। मुझे पता था कि नेहा की इस हर्कत का असर विनोद पर बुरा पड़ने वाला है। नेहा लंड चूसने में इतनी माहिर थी कि उसकी बराबरी कोई नहीं कर सकता था। उसका लंड चूसने का अंदाज़ ही अलग था। वो पहले लंड के सुपाड़े को अपने होठों में ले कर चूसती और फिर धीरे-धीरे लंड को अपने मुँह में भींचती हुई नीचे की और बढ़ती जिससे लंड उसके गले तक चला जाता। फिर अपनी जीभ से चाटते हुए लंड ऊपर की और उठाती। यही हर्कत जब वो तेजी से करती तो सामने वाले की हालत खराब हो जाती थी। इसी तरह से वो विनोद के लंड को चूसे जा रही थी। जब वो उसके सुपाड़े को चूसती तो अपने थूक से सने हाथों से जोर-जोर से लंड को रगड़ती। मैं जानता था कि विनोद अपने आपको ज्यादा देर तक नहीं रोक पायेगा। करीब दस मिनट तक नेहा विनोद के लंड की चूसाई करती रही। मैं और सुधा भी दिलचस्पी से ये नज़ारा देख रहे थे। विनोद ने अपने लंड को नेहा के मुँह से बाहर निकाला और मेरे और सुधा के पास आ खड़ा हो गया। सुधा मेरे लंड को सहला रही थी और विनोद अपने होंठ सुधा के होंठों पे रख उन्हें चूमने लगा। सुधा उससे अलग होते हुए बोली, “अजय!

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” विनोद ने कहा। सुधा ने भी अपनी टाँगें और फैला दी जिससे मुझे और आसानी हो सके। मैं अपनी जीभ उसकी चूत में घुसा कर उसे जोर से चोद रहा था। सुधा की सिस्करियाँ शुरू हो चुकी थी, “हाँ राज… ” इतना कहकर सुधा मेरा हाथ पकड़ मुझे सोफ़े के पास ले गयी। सुधा सोफ़े पे झुक कर घोड़ी बन गयी, और थोड़ा नीचे झुकते हुए उसने अपने गोरे चूत्तड़ ऊपर उठा दिए। उसकी गुलाबी और गीली चूत और उठ गयी थी। मैं अपने हाथ से उसके चूत्तड़ सहलाने लगा। फिर मैं अपना लंड उसकी चूत पर रख कर घिसने लगा। मैंने गर्दन घुमा कर देखा तो विनोद और नेहा मेरे बगल में खड़े एक दूसरे के नंगे बदन को सहला रहे थे, मगर उनकी आँखें मेरे लंड पे टिकी हुई थी। मैंने अपने लंड को धीरे से सुधा की चूत में घुसा दिया। सुधा की चूत काफी गीली थी और एक बार वो झड़ भी चुकी थी, फिर भी मुझे उसकी चूत में लंड घुसाने में बहुत जोर लगाना पड़ रहा था। इतनी कसी चूत थी उसकी। मैंने एक जोर का धक्का मार अपना लंड उसकी चूत की जड़ तक डाल दिया और उसे चोदने लगा। मैंने देखा कि विनोद और नेहा हमारे पास आ गये हैं। नेहा ने ठीक सुधा के बगल में सोफ़े पर लेट कर अपनी टाँगें फैला दी। उसकी चूत का मुँह और खुल गया था। उसकी गुलाबी चूत इतनी प्यारी थी और जैसे कह रही हो कि आओ मुझे चोदो। विनोद उसकी टाँगों के बीच आकर अपना खड़ा लंड उसकी चूत पे घिसने लगा। मैं सुधा की चूत को पीछे से चोद रहा था इसलिए मुझे साफ और अच्छी तरह दिखायी दे रहा था कि विनोद किस तरह अपना लंड नेहा की चूत पे रगड़ रहा था। सुधा ने अपना एक हाथ बढ़ा कर विनोद के लंड को अपने हाथों में ले लिया और उसे नेहा की चूत के मुँह पे रख दबाने लगी। क्या नज़ारा था, एक औरत दूसरे मर्द से चुदवा रही थी और अपने पति का लंड उस मर्द की बीवी की चूत पे रगड़ उसे चोदने को कह रही थी। मैं उत्तेजना के मारे सुधा के चूत्तड़ पकड़ कर कस-कस के धक्के लगा रहा था। सुधा ने नेहा की चूत अपने हाथों से और फैला दी और विनोद के लंड को ठीक वहीं पे रख दिया। विनोद ने इशारा समझ कर एक ही धक्के में अपना लंड पूरा पेल दिया। विनोद मेरी बीवी नेहा को जोर के धक्कों के साथ चोद रहा था और मैं उसकी बीवी सुधा की चूत मे अपना लंड पेल रहा था। मैंने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ायी तो सुधा पीछे की और घूम कर बोली, “सुशील थोड़ा धीरे-धीरे चोदो और अपनी बीवी को देखो।” मैंने देखा कि नेहा की टाँग मुड़ कर उसकी चूचियों पे थी और विनोद धीमे धक्कों के साथ उसे चोद रहा था। उसका मोटा लंड वीर्य रस से लसा हुआ लाईट में चमक रहा था। इतने में सुधा अपनी एक अँगुली नेहा की चूत में डाल अंदर बाहर करने लगी। सुधा की अँगुली और विनोद का लंड एक साथ नेहा की चूत में आ जा रहे थे। नेहा भी पूरी उत्तेजना में अपने चूत्तड़ उछाल कर विनोद के धक्कों का साथ दे रही थी। इतनी जोरदार चुदाई देख मैंने भी अपने धक्कों में तेजी ला दी। सुधा भी अपने चूत्तड़ पीछे की और धकेल कर ताल से ताल मिला रही थी। मैंने अपनी एक अँगुली सुधा की चूत में डाल कर गीली की और फिर उसकी गाँड के छेद पे घुमा कर धीरे से अंदर डाल दी। सुधा सिसक पड़ी, “ओहहहहह सुशील क्याआआआआ कर रहे हो?

” मैंने उसकी बात पे ध्यान नहीं दिया और उसे जोर से चोदते हुए अपनी अँगुली उसकी गाँड के अंदर बाहर करने लगा। अब उसे भी मज़ा आने लगा था। वहीं पर विनोद भी जम कर नेहा की चुदाई कर रहा था। मैंने सुधा के शरीर को अकड़ता पाया, और उसने मेरे लंड को अपनी चूत की गिरफ़्त में ले लिया। मैं जोर-जोर के धक्के लगा रहा था, मेरा भी पानी छूटने वाला था। मैंने दो चार धक्के मारे और मेरे लंड ने सुधा की चूत में बौंछार कर दी, साथ ही सुधा की चूत ने भी अपना पानी छोड़ दिया। मैं फिर भी धक्के मारे जा रहा था और अपनी बीवी नेहा को देख रहा था। उसकी साँसें तेज थी और वो सिसक रही थी, “ओहहहहहह आआहहहहह अजय…

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